मौत का अड्डा बना नीमच शहर का गुप्ता नर्सिंग होम, जिंदगी की जगह मिलती मौत, नीमच,मंदसौर, प्रतापगढ, चित्तोडगढ जिले के लोगों के लिए यह जरूरी खबर, नीमच के गुप्ता नर्सिंग होम में जाना मतलब मौत को निमंत्रण देना है...
नीमच। नीमच शहर में स्थित गुप्ता नर्सिंग होम मौत का अड्डा बन चुका है। गुप्ता नर्सिंग होम में मरीज को ले जाना मतलब मौत को निमंत्रण देना है, यह हम नहीं बल्कि लोग कह रहे है। सोशल मीडिया में गुप्ता नर्सिंग होम के बहिष्कार के लिए अभियान की शुरूआत हो चुकी है। बीते दिनों नीमच जिले के रामपुरा क्षेत्र के ग्राम जोडमी निवासी सत्यनारायण बंजारा की मौत के मामले में मजिस्ट्रीयल जांच जारी है। तीन दिनों तक बंजारा समाज के लोगों द्वारा जिला अस्पताल में आंदोलन करने पर मजिस्ट्रीयल जांच बैठी, अब गुप्ता नर्सिंग होम के संचालक संजय गुप्ता सहित उनके स्टॉफ की मुश्किलें बढती हुई नजर आ रही है, प्रकरण दर्ज न हो, इसलिए डॉ गुप्ता द्वारा राजनैतिक एप्रोच से लेकर धनबल का उपयोग करना शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में मजिस्ट्रीय जांच पूर्ण होगी।
गुप्ता नर्सिंग होम में मरीज की मौत का यह पहला मामला नहीं है, हर महिने कई लोगों की जान जाती है, कई गरीब व्यक्ति विरोध नहीं कर पाते है और वे शव को ले जाते है। एक साल के रिकार्ड की जांच पडताल की जाए तो 100 से अधिक मौंते गुप्ता नर्सिंग होम में हुई है, जिसमें डॉक्टर से लेकर नर्सिंग स्टॉफ की लापरवाही रही है। मौतों के आंकडों को डॉ गुप्ता छिपाता आया है, इस बार डॉ गुप्ता की बंजारा समाजजनों के सामने नहीं चली और भंडाफोड हो गया। सोशल मीडिया में गुप्ता नर्सिंग होम के बहिष्कार को लेकर कई पोस्ट सामने आई है, जिसमें जागरूक लोग गुप्ता नर्सिंग होम के कारनामों की पोल खोल रहे है और वहीं आमजन से अपील भी कर रहे है कि किसी भी अस्पताल में मरीज को ले जाना, लेकिन गुप्ता नर्सिंग होम में भूलकर भी मरीज को न ले जाना, क्योंकि गुप्ता नर्सिंग होम में मौत की गारंटी ली जाती है, न कि जिंदगी बचाने की। परिजन अपने को खोते है और पैसा भी डॉक्टर गुप्ता भरपूर लेता है, मेडिकल वाले से भी इसकी सांठगांठ है, जिन दवाईयों की आवश्यकता ही नहीं, वे दवाईयां भी कमाई के चक्कर में लिख दी जाती है, उन अनावश्यक दवाईयों के सेवन से मरीज मौत के आगोश में पहुंच जाते है।
